नीट यूजी: निजी स्कूल और कॉलेजों में नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता | deooffice.com
नीट यूजी परीक्षा के लिए निजी स्कूलों और कॉलेजों में केंद्र बनाने पर रोक लगा दी गई है। सरकार की विशेष सचिव रचना पाटिल ने मुजफ्फरपुर समेत 34 जिलों के डीएम को इस संबंध में निर्देश जारी किया है। मई में होने वाली नीट यूजी परीक्षा के लिए एनटीए द्वारा केंद्रों का भौतिक सत्यापन कराया गया था। पहले ज्यादातर निजी स्कूलों में ही परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, लेकिन अब यह व्यवस्था बदल दी गई है।
विशेष सचिव रचना पाटिल के निर्देशानुसार, परीक्षा केंद्र केवल सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में ही बनाए जाएंगे। इसी के तहत सभी जिलों के डीएम से नए सिरे से केंद्र निर्धारण कर रिपोर्ट मांगी गई है। मुजफ्फरपुर जिले में लगभग आठ हजार परीक्षार्थियों के लिए 15 केंद्र बनाए जाने हैं।
चार जिलों में नहीं होगा परीक्षा केंद्र
सरकार के आदेश के अनुसार, सारण, शिवहर, सहरसा और किशनगंज में इस बार परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि परीक्षा की सुरक्षा, विश्वसनीयता और निर्वाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
वार्षिक परीक्षा में डी और ई ग्रेड लाने वाले छात्रों पर रहेगा विशेष ध्यान
पटना, deooffice.com
राज्य जिला शिक्षा कार्यालय ने निर्देश जारी किया है कि यदि कोई विद्यार्थी कक्षा एक की वार्षिक परीक्षा में डी या ई ग्रेड प्राप्त करता है, तो उस छात्र पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ऐसे बच्चों की परीक्षा दो माह बाद फिर से ली जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी छात्र असफल न हो।
राज्य शिक्षा विभाग के अनुसार, कक्षा एक से आठवीं तक वार्षिक परीक्षा 10 से 20 मार्च के बीच आयोजित की गई थी। परीक्षा के परिणाम 29 मार्च को अभिभावक-शिक्षक मीट के दौरान जारी किए जाएंगे।
बच्चों को मिलेंगे प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं
जिला शिक्षा कार्यालय के निर्देशानुसार, परीक्षार्थी अपनी उत्तर पुस्तिका और प्रश्नपत्र को घर ले जा सकेंगे। शिक्षक इस बात की जिम्मेदारी लेंगे कि छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं वापस जमा हों। अभिभावकों को यह भी बताया जाएगा कि उनके बच्चे की शैक्षणिक प्रगति कैसी रही है और यदि कोई सुधार की आवश्यकता है तो उस पर ध्यान दिया जाएगा।
स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप योजना, मिलेगा 9,000 रुपये तक प्रोत्साहन
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राज्य के स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थियों को जुलाई से अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलेगा। शिक्षा विभाग इस योजना को अमल में लाने की तैयारी कर रहा है। अब तक राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के 1.2 लाख विद्यार्थियों ने इस योजना में पंजीयन करा लिया है।
सरकार ने इस योजना के तहत 60,000 स्नातक विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप प्रदान करने का लक्ष्य रखा है, जो आवश्यकतानुसार बढ़ाया भी जा सकता है। भारत सरकार की इस योजना के अंतर्गत, चयनित विद्यार्थियों को न्यूनतम 9,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
12 महीने तक मिलेगा प्रशिक्षण
इस योजना में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को 12 महीने तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें सरकारी व निजी संस्थानों में कार्य करने का अवसर मिलेगा। प्रोत्साहन राशि का 50% हिस्सा भारत सरकार देगी, जबकि शेष राशि संबंधित संस्थान द्वारा वहन की जाएगी।
व्यावहारिक और तकनीकी जानकारी पर जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत इस योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान देना है, जिससे वे भविष्य में बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, इस प्रशिक्षण के अंत में उन्हें दक्षता प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
11वीं में 17.50 लाख सीटों पर होगा नामांकन, विवरण जारी
पटना, deooffice.com
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने उच्च माध्यमिक विद्यालयों (शैक्षणिक सत्र 2025-27) में कक्षा 11वीं के नामांकन के लिए सीटों का विवरण जारी कर दिया है। इंटर में नामांकन को लेकर समिति ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं।
10,006 शिक्षण संस्थानों की सूची जारी
इस बार इंटर में नामांकन के लिए 10,006 शिक्षण संस्थानों की सूची जारी की गई है। डिग्री कॉलेजों में इंटर स्तर की पढ़ाई समाप्त कर दी गई है, इसलिए उन्हें इस सूची से हटा दिया गया है। इच्छुक संस्थान 29 मार्च तक सीटों से संबंधित आपत्तियां ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं।
10 अप्रैल के बाद शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया
बिहार बोर्ड के अनुसार, 10 अप्रैल के बाद इंटर नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से OFSS (ऑनलाइन फैसिलिटेशन सिस्टम फॉर स्टूडेंट्स) पोर्टल www.ofssbihar.in पर किए जाएंगे। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
नामांकन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा
विद्यार्थी को आवेदन के समय दिए गए विकल्पों को बाद में बदला नहीं जा सकेगा। नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
