ईपीएफओ ट्रस्टी की बैठक में अहम फैसला
7 करोड़ कर्मियों को पीएफ पर 8.25% ब्याज मिलेगा
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जमा पर ब्याज दर को 8.25% बनाए रखने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुआ। बैठक में तय किया गया कि इस प्रस्ताव को अब वित्त मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद कर्मचारियों के खातों में ब्याज राशि जमा की जाएगी।
ईपीएफ पर ब्याज दर फरवरी 2024 में 8.15% से बढ़ाकर 8.25% की गई थी। मार्च 2022 में यह दर 8.5% से घटाकर 8.1% कर दी गई थी, जो चार दशकों में सबसे कम थी। पिछले वर्ष से यह दर 8.25% बनी हुई है।
अन्य योजनाओं की तुलना में पीएफ पर अधिक ब्याज
ईपीएफओ द्वारा दी जाने वाली 8.25% ब्याज दर मौजूदा अन्य बचत योजनाओं से अधिक है। उदाहरण के लिए:
- सुकन्या समृद्धि योजना – 8.2%
- सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम – 8.2%
- पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) – 7.1%
- किसान विकास पत्र – 7.5%
ईपीएफ कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित और अधिक ब्याज देने वाली निवेश योजना बनी हुई है।
बीमा योजना में महत्वपूर्ण बदलाव
बैठक में कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) में सुधार किया गया है। इस योजना के तहत अब 20,000 से अधिक परिवारों को लाभ मिलेगा। महत्वपूर्ण संशोधन इस प्रकार हैं:
- न्यूनतम बीमा राशि – यदि कर्मचारी की सेवा के 1 साल के भीतर मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को अब ₹50,000 की न्यूनतम बीमा राशि मिलेगी।
- अंतिम योगदान की शर्त – अब कर्मचारी की मृत्यु उसके अंतिम पीएफ योगदान के 6 महीने के भीतर होती है, तो परिवार बीमा लाभ का हकदार होगा। पहले यह सुविधा नहीं थी।
- बीमा लाभ की निरंतरता – पहले, यदि कर्मचारी ने नई नौकरी जॉइन करने में 1-2 दिन का भी ब्रेक लिया, तो उसे 2.5 लाख से 7 लाख रुपये तक के बीमा का लाभ नहीं मिलता था। अब नई नौकरी दो महीने के भीतर जॉइन करने पर बीमा लाभ जारी रहेगा।
निरंतर सेवा की नई परिभाषा
ईपीएफओ ने “निरंतर सेवा” की परिभाषा में भी बदलाव किया है। अब यदि कर्मचारी दो प्रतिष्ठानों के बीच 2 महीने तक का अंतराल रखता है, तो भी उसे “निरंतर सेवा” माना जाएगा और उसके लाभ नहीं कटेंगे। इससे कर्मचारियों को नई नौकरी खोजने में सहूलियत मिलेगी और बीमा लाभ में बाधा नहीं आएगी।
बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण पर संकट
स्कूलों की रिक्तियां अपडेट नहीं होने से फंसा मामला
बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया अटकी हुई है। राज्य के 3,696 स्कूलों में शिक्षकों की रिक्तियां अभी तक अपडेट नहीं की गई हैं। यह देरी शिक्षा विभाग की ओर से रिक्तियों के सत्यापन और अनुमोदन में लापरवाही के कारण हो रही है।
रिक्ति अपडेट की धीमी प्रक्रिया
- केवल 15% स्कूलों ने रिक्तियां अपडेट कीं, लेकिन अधिकारियों द्वारा इन्हें अप्रूव नहीं किया गया।
- पूर्णिया जिले में केवल 37% रिक्तियां अपडेट हुई हैं, जबकि पश्चिम चंपारण में 95% और वैशाली में 91.7% रिक्तियां अपडेट हो चुकी हैं।
- शिक्षा निदेशक पंकज कुमार ने सभी जिलों को 124 घंटे में शत-प्रतिशत रिक्तियां अपडेट करने का निर्देश दिया है।
प्रभाव और समाधान
यदि रिक्तियों का सत्यापन और अनुमोदन जल्द नहीं हुआ, तो शिक्षकों के स्थानांतरण में देरी होगी, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द रिक्तियों को अप्रूव करें।
बिहार के आठ प्रखंडों में शिक्षा पदाधिकारी नियुक्त
पर्यवेक्षी पदाधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभार
बिहार के आठ प्रखंडों में नए शिक्षा पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं। पहले इन प्रखंडों में बीईओ और डीपीओ को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी स्थानीय प्रखंड स्तर के अधिकारियों को दी गई है।
किन प्रखंडों में हुई नियुक्तियां?
नए बीईओ निम्नलिखित प्रखंडों में नियुक्त किए गए हैं:
- नुआंव
- मोहनिया
- रामपुर
- कुदरा
- अधौरा
- दुर्गावती
- भभुआ
- चैनपुर
इस बदलाव से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान में सुधार होगा।
बिहार बोर्ड सक्षमता परीक्षा 2024
शिक्षकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 12 मार्च
बिहार बोर्ड ने स्थानीय निकाय के शिक्षकों के लिए सक्षमता परीक्षा (Competency Test) की अधिसूचना जारी की है।
परीक्षा का प्रारूप और महत्वपूर्ण तिथियां
- अंतिम आवेदन तिथि – 12 मार्च 2024
- परीक्षा का प्रारूप – कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT)
- समय अवधि – 2 घंटे 30 मिनट
- प्रश्नों का प्रकार – बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
- न्यूनतम योग्यता –
- सामान्य वर्ग – 34%
- SC/ST, दिव्यांग और महिला उम्मीदवार – 32%
- परीक्षा शुल्क – ₹1100
आवेदन में ध्यान देने योग्य बातें
- अभ्यर्थियों को अपने पिता/पति का नाम, जन्मतिथि और योगदान की तिथि सही ढंग से भरनी होगी।
- नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी, जिससे अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा।
मधुबनी: सरकारी शिक्षक ने नाबालिग से किया दुष्कर्म
7 महीने से कर रहा था अपराध, गर्भपात भी कराया
मधुबनी जिले के धनहा थाना क्षेत्र में एक सरकारी शिक्षक ने नाबालिग छात्रा के साथ 7 महीने तक दुष्कर्म किया।
घटना का विवरण
- आरोपी शिक्षक सुरेंद्र यादव ने नाबालिग को धमकाकर शारीरिक शोषण किया।
- नाबालिग गर्भवती हो गई, जिसके बाद आरोपी ने गर्भपात भी करा दिया।
- पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
प्रशासन की कार्रवाई
इस मामले में शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन पर दबाव है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए।
निष्कर्ष
बिहार और देशभर में शिक्षा और कर्मचारियों से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए हैं। ईपीएफओ की बैठक में कर्मचारियों के लिए 8.25% ब्याज दर तय की गई, जो अन्य योजनाओं से अधिक है। बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया धीमी होने के कारण समस्याएं बनी हुई हैं। वहीं, मधुबनी में सरकारी शिक्षक के दुष्कर्म मामले ने शिक्षा जगत को शर्मसार कर दिया है।

