पटना, कार्यालय संवाददाता।
राज्यभर में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को अब दरी पर बैठाकर ही भोजन कराना अनिवार्य होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक पर सख्त कार्रवाई होगी। यह निर्देश राज्य के करीब 65 हजार स्कूलों में लागू किया गया है।
शिक्षा विभाग द्वारा लगातार स्कूलों का निरीक्षण किया जा रहा है। विभाग के अपर मुख्य सचिव ऑनलाइन माध्यम से औचक निरीक्षण कर रहे हैं। हाल के निरीक्षण में पाया गया कि कई स्कूलों में बच्चे बिना दरी के जमीन पर बैठकर भोजन कर रहे थे।
दरी की व्यवस्था का निर्देश
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि स्कूलों को मिलने वाले ग्रांट से प्रधानाध्यापक दरी का प्रबंध सुनिश्चित करें। ठंड के मौसम में बच्चों को जमीन पर बैठने में परेशानी न हो, इसके लिए दरी का उपयोग अनिवार्य है। इस कदम से राज्य के लगभग एक करोड़ बच्चों को लाभ होगा, जो मिड-डे मील योजना के तहत भोजन प्राप्त कर रहे हैं।
खामियों पर होगी कार्रवाई
निरीक्षण टीम को स्कूलों के भोजन की गुणवत्ता और अन्य अनियमितताओं पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। अगर किसी स्कूल में अनियमितता पाई गई, तो जुर्माना लगाया जाएगा और प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
बीएमआई मापने की तैयारी
स्कूलों में बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) मापा जाएगा, ताकि कुपोषण का पता लगाया जा सके और बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।
स्कूल ग्रेडिंग पर पड़ेगा असर
स्कूलों में मिड-डे मील और अन्य व्यवस्थाओं में कमी का सीधा असर साल में दो बार होने वाली ग्रेडिंग पर पड़ेगा। डीईओ को सुनिश्चित करना होगा कि दरी, भोजन, और थाली जैसी मूलभूत सुविधाएं सभी स्कूलों में उपलब्ध हों।
निष्कर्ष
राज्यभर में शिक्षा विभाग की यह सख्ती बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी सुविधाओं के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे न केवल मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि बच्चों में कुपोषण की समस्या को भी दूर करने में मदद मिलेगी।

