टीआरई-3 के तहत शिक्षकों की पोस्टिंग प्रक्रिया में इस बार बड़ा बदलाव किया गया है। महिला, पुरुष और दिव्यांग शिक्षकों के आधार पर स्कूलवार रिक्तियों की पहचान कर पदस्थापन किया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से एक नया पोर्टल तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से स्कूलवार आवश्यकता की जानकारी अपलोड की जाएगी। सोमवार से इस नई प्रणाली के तहत रिक्तियों को अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने स्कूलों में महिला, पुरुष और दिव्यांग शिक्षकों की जरूरत का विवरण पोर्टल पर दर्ज करें। प्रत्येक स्कूल में वर्तमान में कार्यरत महिला और पुरुष शिक्षकों की संख्या तथा आवश्यकता की स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाई जाएगी। पहले की प्रक्रिया में केवल यह दर्शाया जाता था कि स्कूल में कितने पद रिक्त हैं, लेकिन उसमें लिंग अथवा दिव्यांगता के आधार पर कोई वर्गीकरण नहीं होता था।
महिला और दिव्यांग शिक्षकों के लिए पास के स्कूलों में होगी पोस्टिंग
टीआरई-3 के अंतर्गत महिला और दिव्यांग अभ्यर्थियों को उनके पास के स्कूलों में ही नियुक्ति देने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है। पहले की प्रक्रिया में इन वर्गों के शिक्षकों को दूर-दराज के स्कूलों में भेजा जाता था, जिससे उन्हें काफी असुविधा होती थी। अब जिन स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय, रैम्प जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, उन्हीं में दिव्यांग शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
दो हजार से अधिक पदों पर होगी नियुक्ति
मुजफ्फरपुर जिले में टीआरई-3 के तहत दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति होनी है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) अजय कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों की संख्या और आवश्यकतानुसार स्कूलों में महिला और दिव्यांग शिक्षकों के लिए पद सृजित किए जाएंगे। प्रत्येक रिक्ति को कोडवार अपलोड करना होगा, ताकि राज्य स्तर से उसी कोड के आधार पर पदस्थापन किया जा सके। महिला और दिव्यांग रिक्तियों को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत कर कोड में डाला जाएगा, जिससे कि सही अभ्यर्थी की नियुक्ति उचित स्थान पर हो सके।
इस नई प्रणाली से उम्मीद की जा रही है कि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी होगी।

