विद्यालयों का ऑनलाइन निरीक्षण: अनुपस्थित प्रधान शिक्षक निलंबित, शिक्षकों की जिम्मेदारियों पर सख्ती

पटना, deooffice.com प्रतिनिधि।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में बिहार सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने सोमवार को विभिन्न विद्यालयों का ऑनलाइन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पूर्वी चंपारण जिले के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, धवही के प्रधान शिक्षक रितेश कुमार वर्मा की उपस्थिति स्कूल में नहीं पाई गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी उनके विरुद्ध शुरू कर दी गई है।
डॉ. सिद्धार्थ ने स्वयं प्रधान शिक्षक को फोन किया और पूछा, “रितेश कुमार वर्मा जी बोल रहे हैं? आप स्कूल में हैं?” इस पर शिक्षक ने जवाब दिया, “दो मिनट में आ रहे हैं सर, दुकान पर गए थे।” इस पर डॉ. सिद्धार्थ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दुकान पर क्या कर रहे थे? स्कूल में मन नहीं लगता है क्या? अभी 11:30 बजे हैं और आप स्कूल में नहीं हैं।” शिक्षक ने सफाई दी कि उनका घर 30 किमी दूर है, जिस पर सचिव ने स्पष्ट रूप से नाराजगी जताई और जिला शिक्षा पदाधिकारी को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया।
स्थल निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन (MDM) का संचालन भी बंद था। स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने के कारण प्रधान शिक्षक को निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
इसी क्रम में, सीतामढ़ी जिले के बोखरा स्थित बनौल मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक से भी संपर्क किया गया, जहां केवल 10-12 छात्र ही उपस्थित पाए गए। यह उपस्थिति भी विद्यालय में शिक्षक उपस्थिति और शिक्षा के स्तर पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
गलत एसएलसी पर भी होगी कड़ी कार्रवाई
पटना से प्राप्त एक अन्य जानकारी के अनुसार, सरकारी विद्यालयों में गलत विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र (SLC) जारी किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने सभी प्रधानाध्यापकों को चेतावनी दी है कि विभागीय नियमों का उल्लंघन कर गलत एसएलसी जारी करना एक गंभीर दोष है। उन्होंने कहा कि नामांकन प्रक्रिया में भी कई बार अनियमितताएं पाई गई हैं, जिससे छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक जीवन पर असर पड़ता है। ऐसे मामलों में संबंधित प्रधानाध्यापक पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अप्रैल में सत्रांत रिवीजन व मॉर्निंग शिफ्ट का आदेश

राज्य भर में गर्मी को देखते हुए 7 अप्रैल से 1 जून तक विद्यालयों का संचालन सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। सभी विद्यालयों में अप्रैल महीने में पूर्व सत्र की पढ़ाई का रिवीजन कराया जा रहा है। यह रिवीजन गणित, भाषा, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान जैसे मुख्य विषयों में किया जा रहा है। इसके बाद स्कूल स्तर पर परीक्षा भी आयोजित की जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा 6 अप्रैल को जारी पत्र के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को रिवीजन क्लासेज के माध्यम से पूर्ववर्ती पाठ्यक्रम की दोहराई कराई जाएगी। इसी क्रम में कक्षा 9 से 12 तक के लिए भी आवश्यकतानुसार रिवीजन का प्रावधान रखा गया है। विद्यालय प्रधान व प्रभारी प्रधानाध्यापक निर्धारित रूटीन के अनुसार रिवीजन संचालित करेंगे।
‘चेतना सत्र’ के माध्यम से शिक्षा में नवाचार
राज्य के सभी प्रारंभिक व माध्यमिक विद्यालयों में चेतना सत्र का आयोजन सुबह 6:30 से 7:00 बजे तक किया जा रहा है। इसमें 52 सेकंड का राष्ट्रगान, 3-4 मिनट की बिहार राज्य प्रार्थना, 5 मिनट का योग-व्यायाम-ध्यान, संविधान की प्रस्तावना, सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तर, छात्र-शिक्षक की अभिव्यक्ति, प्रेरक प्रसंग और प्रमुख समाचार वाचन जैसे गतिविधियाँ शामिल की जा रही हैं। इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों में अनुशासन, ज्ञान व राष्ट्रीय चेतना का विकास करना है।
शिक्षकों द्वारा बनाई गई लर्निंग सामग्री का होगा उपयोग
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को लर्निंग मटेरियल (TLM) तैयार करने को कहा है। मंगलवार से राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) में दो दिवसीय टीएलएम मेला आयोजित किया जा रहा है, जहां राज्य भर के शिक्षक अपने द्वारा बनाई गई लर्निंग सामग्री की प्रदर्शनी लगाएंगे। प्राथमिक शिक्षा निदेशक शाहिला ने बताया कि इन सामग्रियों का प्रयोग विद्यालयों में किया जाएगा, जिससे छात्रों की शिक्षा में रुचि और सहभागिता दोनों बढ़ेगी।
निष्कर्ष
शिक्षा विभाग की इन पहलों से यह स्पष्ट है कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक जवाबदेही और छात्र सहभागिता को प्राथमिकता दे रही है। ऐसे समय में जब सरकारी स्कूलों की साख पर सवाल उठाए जाते हैं, इन पहलों से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि विद्यालयों में अनुशासन व पारदर्शिता भी आएगी।

